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#lockdown: कोरोना का कहर: रोज़ाना कमाने वालों की रोजी, रोटी, सेहत सब संकट में!

कोरोना वायरस सम्पूर्ण विश्व या यूं कहें तो मानव जाती के खतरा बन गया है , हिंदुस्तान ही नहीं पूरा विश्व कोरोना के कहर से सदमें में हैं , चीन में पनपा कोरोना इटली जर्मनी , अमेरिका और दुसरे देश होते हुए भारत पहुंचा और भारत पूरी तरह आपातकाल की स्थति से जूझ  रहा है , अधिकतर राज्यों में लोक डाउन है , 3 से ज्यादा राज्यों में पूर्ण कर्फ्यू है और ये सब इस लिए सामाजिक आइसोलेशन सुनिश्चित किया जा सके ताकि कोरोना का संक्रमण एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति में न फैले . सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में कोरोनोवायरस के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. इस तेजी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जब खबर लिखना शुरू किया है तब के आंकड़ों में और जब आप इसे पढ़ रहे होंगे तब के आंकड़ों में जमीन आसमान का फर्क आ चुका होगा. खैर हम ये नहीं कह सकते कि आपको डरने की जरुरत नहीं, क्योंकि ये पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है पर भारत के संदर्भ में दूसरी और भी दिक्कते हैं.  सरकारी आंकड़ों की माने तो देश में कुल हर साल 4.75 मिलियन लोग हर साल काम करने लगते हैं जिसका बड़ा भाग असंगठित क्षेत्र से होता है , केवल 17% लोग ही संगठित क्षेत्र में अपनी आजीविका को सुरक्षित कर पाते हैं बाकी या तो छोटे मोटे खुद का काम करते हैं , या घरों , चाय की दुकानों, ढाबों, छोटे कारखानों में काम कर अपनी आजीविका चलाते हैं कोरोना का कहर इन मज़दूर तबकों पर कुछ ज्यादा ही पड़ा है , आइये सुनते हैं क्या कहती है देश की मज़दूर और असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे लोगों का .

 कोरोना का यह वो एंगल है जो शायद अभी उतना विकराल दिखाई ना दे, लेकिन आने वाले वक्त में हम चौतरफा मार खा रहे होंगे. समस्या कितनी गंभीर हो रही है इस बात का जायजा लेने के लिए मोबाइलवाणी ने अपने श्रोताओं से बात की. और 50 से ज्यादा व्यापारियों, दिहाड़ी मजदूरों ने अपनी तकलीफ बयां की है.

 अफवाहों ने बंद करवाईं दुकानें

जैसे ही कोरोना ने भारत में दस्तक दी वैसे ही अफवाहें शुरू हो गईं. जिसका सबसे बुरा असर पड़ा पोल्ट्री फार्म चलाने वालों पर, मांसाहार की दुकानें खोले बैठे दुकानदारों पर. लोगों के मन में यह भय बैठा हुआ है कि हर तरह का मांसाहार चाहे वह किस भी जंतु का हो, नुकसानदायक है. ये अफवाह इतनी तेजी से फैली की रातों—रात इस रोजगार से जुड़े लोगों की दुकानें बंद हो गईं.

 उत्तरप्रदेश के प्रमोद वर्मा कहते हैं कि व्यापार पर इतना बुरा असर कभी नहीं हुआ. लोग अब मीट खरीदने से डरने लगे हैं. हमारे पास जो पुराना स्टॉक था वो भी खराब हो गया. फिलहाल जो है उसे 40 रुपए किलो में बेचना पड़ रहा है. बिहार के जमुई से एक मीट व्यापारी ने मोबाइलवाणी पर अपनी दिक्कत बताई. उन्होंने कहा कि होली के समय कुछ उम्मीद थी पर कोरोना ने वो भी नहीं होने दिया. हम लोगों को कितना भी समझा लें लेकिन लोग यही मान रहे हैं कि मीट खाने से कोरोना होता है. शेखपुरा से संजीव कुमार बताते हैं कि हमारे यहां मीट की आधे से ज्यादा दुकानें बंद हो चुकी हैं. अगर यही हाल रहा तो कम से कम मीट व्यापारी तो घर पर ही बैठ जाएंगे.

 बिहार के शिखपुरा जिला अरियरी प्रखंड के पोल्ट्री फार्म संचालक ने मोबाइलवाणी पर अपनी बात रिकॉर्ड की. उन्होंने कहा कि पूरा व्यापार घाटे में है. दुकानदारों से माल बिक नहीं रहा है तो नए ऑर्डर आने बंद हो गए हैं. हमारे पास पहले से जो स्टॉक है उसे सम्हाले रखने के लिए अलग से खर्च करना पड़ रहा है. ये तो हम जैसे लोगों पर दो तरफा मार है.

 अचानक हो गए बेरोजगार

बिहार के जमुई से पूनम प्रिंटिंग प्रेस के संचालक अमित कुमार कहते हैं कि लॉकडाउन होना जरूरी है लेकिन हमारे व्यापार पर इसका बुरा असर पड़ रहा है. जो लोग कंपनियों में हैं उन्हें कुछ वेतन तो मिलेगा पर हमारी दुकानों पर तो ग्राहक ही नहीं आ रहे और पता नहीं ये सिलसिला कब तक जारी रहेगा.

 जमुई से ही अमित कुमार सविता ने मोबाइलवाणी पर अपनी रिपोर्ट रिकॉर्ड की है. जिसमें उन्होंने क्षेत्र के कई व्यापारी और दुकानदारों से बात की. इन सभी का कहना है कि हम लोगों की रोजी—रोटी बंद हो गई है. अगर बीमारी से लड़ना है तो जेब में पैसे भी तो होना चाहिए. कई ऐसे दुकानदार हैं जिनका धंधा पहले ही मंदा था अब कोरोना के चक्कर में और दिक्तत हो रही है. सिकंदारा से संजीव कुमार चौधरी बताते हैं कि हमारे क्षेत्र की कई दुकानें बंद हैं. लोग सामान खरीदने से तब डर रहे हैं. सरकार ने कहा ​है कि राशन और जरूरी सामान की दुकानें खोली जा सकती हैं पर डर इतना ज्यादा है कि लोग इन्हें भी नहीं खोल पा रहे हैं.

 पलायन से कैसे निपटेंगे?

 कोरोना के डर से महानगरों में लॉकडाउन है. नौकरीपेशा लोग घरों में बैठे हैं, दफ्तरों में ताले लगे हैं. अब दिक्कत है इन महानगरों में दिहाड़ी मजदूरी करने वालों की. काम ना मिलना एक संकट है और फिर अपने—अपने घर पहुंचना दूसरी तरह की जंग. इन लोगों का तो रातों—रात रोजगार छिन गया. लगभग हर फील्ड में काम बंद हैं और बाहर से आए मजदूर घर वापिस लौट रहे हैं. इन मजदूरों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा है कि वे कुएं और खाई के बीच में फंसे हैं. बिना पैसों के घर पर क्या करेंगे? और बाहर काम मिल नहीं रहा. एक अनुमान के अनुसार अब तक बिहार, झारखंड, मप्र, छत्तीसगढ़ और उत्तर भारत के अलग—अलग राज्यों के करीब 3 लाख मजदूर अपना काम छोड़कर घर लौट रहे हैं.

 2011 की जनगणना के अनुसार मुंबई, जिसमें मुंबई शहर, मुंबई उपनगर और ठाणे जिला शामिल हैं, में 1 करोड़ प्रवासी रहते हैं. इनमें से 30 प्रतिशत प्रवासी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था से अपनी आजीविका कमाते हैं. 31 मार्च तक के लिए की गई बंदी की सबसे अधिक मार इन मजदूरों को ही पड़ी है. इसीलिए इन्होंने फैसला किया है कि वे अपने घर पहुंच जाएं. अब अंदाजा लगा लीजिए कि देश के बारी महानगरों का हाल क्या होगा.

 मोबाइवाणी पर कई प्रवासी मजदूरों ने अपनी बात रिकॉर्ड की है. इनमें से कुछ ने कहा है कि वे सुरक्षा एजेंसी में सिक्योरिटी गार्ड थे पर अब जब कं​पनियां ही बंद है तो उनका काम भी बंद हो गया. इमारतों के निर्माण कार्य में लगे मजदूरों का भी यही हाल है. परिवहन बंद होने के कारण आॅटो, टैक्सी चलाने वाले भी घर बैठ गए हैं.

 जमुई जिले से प्रताप कुमार जो चिकन की दुकान चलाते हैं उनका कहना है की पहले दिन भर में 400-500 रुपया कमा पाते थे कोरोना की वजह से दिन भर अब कोई ग्राहक नहीं आता है दिन भर में केवल 1-2 आते हैं आमदनी बिलकुल ख़तम होगई है , घर चलाना मुश्किल होगया है , सरकार से अनुरोध कर रहे हैं की उनके लिए कुछ रहत का इन्तेजाम करे..

 ये अछि बात है की बिहार सरकार द्वारा सभी राशन कार्ड धारकों को लोक डाउन से निपटने के लिए 1000 रूपये रहत के तौर पर घोषणा की गयी है , वहीँ सभी पेंशन धारकों को 3 महीने की राशी उनके खाते में अग्रिम सहायता के तौर पर प्रदान की जायेगा .

 आप को बता दें की मोबाइल वाणी द्वारा श्थिति की वास्तविकता को समझने के लिए एक सर्वेक्षण किया गया था जिसमें कुल 62 9 लोगों ने इस सर्वेक्षण के सभी 9 सवालों का जवाब दिया , इस सर्वेक्षण में अबसे जयादा यानि की 46% प्रवासी मजदूरों और असंगठित ख्सेत्र में काम कर रहे लोगों ने बिहार से भाग लिया , इस सर्वेक्षण में झारखण्ड से 15 % , दिल्ली से 5% मध्य प्रदेश से 12% और उत्तर प्रदेश से 11 % श्रमिकों ने भाग लिया .

 इस सेर्वेस्खन में कुल 9 सवाल पूछे गए थे जिसका जवाब फ़ोन से बटन दबाकर दिया जा सकता था , सबसे महत्वपूर्ण सवाल जनb उनसे पूछह गया की क्या इस कोरोना महामारी से निपटने के लिए आप के पास किसीतरह की बचत है के जवाब में 69% श्रमिकों ने माना की उनके पास ऐसी कोई बचत नहीं जिससे वो इस मुश्किल घरी में अपना व परिवार का पेट पाल सकते हैं , यानी रोजाना कमाएंगे तो घर चलेगा नहीं तो कुछ नहीं हो सकता .

 वैसे इस सन्दर्भ में दिल्ली सरकार और अन्य राज्य की सरकारों  ने गरीब जनता को भूक से निपटने के लिए राशन और दुसरे प्रकार के पेंशन का अलान कर चुकी है , दिल्ली सरकार ने कहाँ सभी निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए 4-5 हज़ार रूपये की राशी दिजयेगे वहीँ 50 % प्रतिशत अधिक राशन भी दिया जायेगा ताकि उन्हें किसी भी प्रकार से भूखमरी का शिकार न होना पड़े .

 इस सन्दर्भ में मोबाइल वाणी के सामुदायिक रिपोर्टर अनोध ठाकुर ने जब मुंगेर के ऐसे ही असंगठित ख्सेत्र में काम कर रहे मजदूर मुकेश कुमार से बात की जो 28 साल के हैं का कहना है की वह 1 दिन में 250-300 रुपया कमा पाते थे , इहें क्रोरोना वायरस के बारे में तो मुख्या जानकारी है , जिन्हें मोबाइल पर इस बिमारी के बारे में पता चला , जांच के बारे में बहूत कुछ पता नहीं है , दर से काम करने के लिए घर नहीं निकल रहे हैं , काम नहीं करेंगे तो खायेंगे क्या , यह कहते हैं की मजदूर हैं काम करेंगे तो खायेंगे नहीं तो नहीं , अभी काम न होने की वजह से किसी और से पैसा उधार लेकर घर चला रहे हैं , जयादा समय चला तो परिवार भूखे  रहने की स्थिति में आजायेगी .

 देश में कोरोना वायरस के संकट को देखते हुए जहां कई राज्यों और शहरों में लॉकडाउन जारी है. इसके चलते कई निजी और सरकारी संस्थाओं के कर्मचारी अपने अपने दफ्तर नहीं जा पा रहे हैं और लोगों को नौकरी जाने का डर भी सता रहा है. ऐसे में देश में श्रम मंत्रालय ने अहम निर्देश दिया है जिसके जरिए लोगों को परेशानी न हो. श्रम मंत्रालय ने सभी सरकारी और प्राइवेट कंपनियों से कर्मचारियों की नौकरी बहाल रखने और वेतन नहीं घटाने को कहा है. श्रम मंत्रालय ने छुट्टी लेने पर भी कर्मचारियों के ड्यूटी पर माने जाने का निर्देश दिया है. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि इस समय अगर कोई कर्मचारी कोरोना वायरस संकट के कारण छुट्टी लेता है तो भी उसके ड्यूटी पर आने जैसा ही माना जाए और इसके तहत उसकी सैलरी नहीं काटी जाए. इसके अलावा अगर कोई दफ्तर इस आफत के कारण बंद होता है तो ये माना जाए कि उसके कर्मचारी ड्यूटी पर हैं.

 डरने की जरूरत  है!

एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सकल आधार पर अनुमान है कि परिवहन, पर्यटन और होटल इन तीन बाजार खंडों में 5 प्रतिशत कामकाज ठप होने के साथ भंडारण और संचार खंड के साथ इसका जीडीपी पर 0.9 प्रतिशत का असर पड़ेगा. इसका प्रभाव वित्त वर्ष 2019-20 और 2020-21 में पड़ेगा। इसमें 2020-21 में प्रभाव अधिक व्यापक होगा. वहीं दूसरी ओर यात्रा के लिए औसतन 2.5 करोड़ लोग हवाई जहाज और 30 करोड़ ट्रेन का उपयोग करते हैं. इसमें 10 प्रतिशत की कमी से मासिक आधार पर आय में 3,500 करोड़ रुपये की कमी आएगी. 

भारत के लिए कोरोनोवायरस महामारी का व्यापार प्रभाव $ 348 मिलियन होने का अनुमान है. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश अब चीन में विनिर्माण मंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली शीर्ष 15 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. यदि चीन में शटडाउन जारी रहता है, तो 2020 में भारतीय ऑटो मैन्यूफैक्चरिंग में 8-10 प्रतिशत का संकुचन होने की उम्मीद है.

 वहीं दूसरी ओर मेडिकल स्टोर में दवाओं की कमी हो रही है. तमाम बड़े शहरों में केमिस्ट, सैनिटाइज़र और मास्क के ऑर्डर तो दे रहे हैं लेकिन उन्हें एक हफ़्ते से माल की डिलिवरी नहीं मिल पा रही है. अब जब बहुत से भारतीय अपने यहां दवाएं, सैनिटाइज़र और मास्क जमा कर रहे हैं, तो ये सामान अधिकतम खुदरा मूल्य से भी अधिक दाम पर बिक रहे हैं. 

कुल मिलाकर हर वो क्षेत्र जहां मजदूर तबके की जरूरत है वो प्रभावित है. इंटरनेशन कंपनियों में काम करने वाले कमर्चारी लैपटॉप लेकर घर पर बैठे हैं और काम कर रहे हैं पर उन लोगों का क्या जो ऑफिस में आपको चाय पिलाते थे, आपका कोरियर लेकर आते थे, साफ—सफाई करते थे, आपका परिवहन आसान करते थे…